दुश्मन का स्वार्थ – हिंदी कहानी

दुश्मन का स्वार्थ – आज के इस कथा से आपको पता चलेगा कि आपको अपने दुश्मन पर भरोसा नहीं करना चाहिए. (Dushman ka swarth story in hindi)

दुश्मन का स्वार्थ – 

एक पहाड़ी पर एक बूढ़ा सांप रहता था. उसके जवानी के दिनों में उसने बहुत से मेंढक और चूहों का शिकार किया था. लेकिन अभी के समय में उसके विषैले दांत टूट जाने के बाद वह शिकार नहीं कर पा रहा था.

जो चूहे उससे डरते थे आज वही चूहे उसके आसपास से गुजर जाते थे. लेकिन वह बूढ़ा सांप उनका शिकार नहीं कर पाता था. बिल में जाकर एक दो चूहे के बच्चों को खाना यही बस उसका काम बाकी रह चुका था.

उसने सोचा कि, कोई तरकीब लड़ाई जाए और चूहों के साथ साथ मेंढक का भी शिकार किया जाए. उसने बीच में मौजूद तालाब के पास जाने का फैसला लिया. वह जाकर उसने मेंढक के सरदार को कहा की मुझे आपकी सेवा करनी है.

इस पर मेंढक का सरदार बोला, आप तो मेरे दुश्मन हो, आपको भला मेरी सेवा करके क्या मिलेगा. सांप ने झूठी कहानी सुनाना चालू कर दिया. उसने कहा कि, मुझे शाप मिला है और उससे मुझे छुटकारा बस आपकी सेवा करके ही होगा.

ढोल की पोल

मेंढक ने पूछा आपको कौनसा शाप मिला है. इस पर सांप कहते हैं, एक दिन बच्चे खेल रहे होते हैं. किसी बच्चे का मेरे ऊपर पैर पड़ जाता है. तब मैं उसे काट लेता हूं.

लेकिन बच्चे तो भगवान कृष्ण का उतार होते हैं. इसलिए कृष्ण मेरे सपने में आकर मुझे शाप देते हैं. मैं उस शाप बाहर निकलने के लिए नागराज से विनती करता हूं. तब वह मुझे कहते हैं कि, तुम अगले 1 साल तक मेंढको की सेवा करो.

मेंढक के राजा को यह बात अजीब लगती है. लेकिन उसे भी लगता है कि, जीवन में ऐसा पहली बार होगा. जब एक सांप की सवारी पर एक मेंढक बैठेगा. वह सोचता है और अपने सभी मित्रों से यह बात साझा करता है.

सभी मेंढक सांप की बात पर यकीन कर लेते हैं. अगले दिन से सांप हर एक को अपनी पीठ पर बिठाकर तालाब की सैर कराता था. सबसे पीछे रहने वाले आखरी सवारी को तालाब की सैर करने के बाद उसका शिकार कर देता था.

दिन प्रतिदिन तालाब में मौजूद मेंढक की संख्या कम होने लगी. मेंढक के सरदार को इस बात की भनक लग गई. तो उसने सांप से पूछा कि, इस तालाब के बाकी मेंढक कहां चले गए.

इस पर सांप कहता है की सांप की सवारी से आपकी प्रतिमा और भी ऊंची हो गई है. इसे फैलाने के लिए सभी मेंडक चारों दिशाओं से अपने दोस्तों को बताने के लिए निकल चुके हैं.

एक दिन ऐसा आता है जब तालाब में सिर्फ एक ही मेंढक बचता है और वह उनका सरदार ही होता है. सरदार तालाब में सांप की पीठ पर बैठकर शेयर करता है और अंत में वह भी सांप का शिकार बन जाता है.

सीख – कभी भी दुश्मन की बातों पर यकीन करना नहीं चाहिए. दुश्मन हमेशा ही दगाबाज होता है.

तीन मछलियां

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