हनुमान चालीसा का सही अर्थ हिंदी में | मनोकामना होगी पूरी |

हनुमान जिन्हे हम बजरंगबली के नाम से भी जानते है । कई जगह प्यार से इन्हे अंजनी पुत्र भी कहते है । लोग कहते है की वो रुद्र का अवतार है । अपने भक्तो पे उनिया आशीर्वाद हमेशा ही रहता है । अगर किसीने सच्चे मन से से हनुमान चालीसा का पठन किया तो भगवान हनुमान तुरंत उस भक्त को दर्शन देते है, उनकी मस्त करते है ऐसी लोगो की धारणा हैं । (hanuman chalisa in hindi)

आज के इस लेख में हम सीखेंगे की हनुमान चालीसा का हिंदी में अर्थ क्या है? इसी के साथ आपको हनुमान चालीसा कैसी पढ़नी चाहिए इसके बारे में भी हम यहां चिंतन करेंगे । हनुमान जीनी बहुत सी स्त्रोत मिलते है । लेकिन अगर आपको हनुमान चालीसा आती है तो ऐसा मानना है की आप भूत से बच सकते हो । इसी के साथ आपको किसी बात का डर नही रहता ।

हनुमान चालीसा इन हिंदी पीडीफ: (hanuman chalisa in hindi pdf download)

अगर आप भी हनुमान चालीसा पढ़ने एवम उसे याद करने की कोशिश करते हो तो आपको उसका सही अर्थ पता होना चाहिए । हनुमान चालीस में दो भाग है पहले में एक में दोहा और दूसरा चौपाई है ।

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दोहा: 

  • शुरुवात में गुरु महाराज के पावन चरणों की धूल को स्पर्श करके आज में रघुवीर मतलब बजरंगबली की गाथा सुनाने जा रहा हु जो चारो अर्थात मोक्ष धर्म कर्म अर्थ को प्रदान करते है । || १ ||
  • हे बजरंगबली आज मै आपका आवाहन करता हु । आप तो जानते और समझते ही है मेरी बुद्धि शरीर और मन निर्बल हो चुका है । मुझे शारीरिक मानसिक और बौद्धिक सुदृढ़ता प्रदान करे ताकि मेरे दोषी और दुखो का नाश करे । || २ ||

चौपाई: 

  • हे रघुवीर आपकी जय हो । आपका ज्ञान और आपके अंदर के गुण अपार है । हे कपिश्वर आपकी जय हो । आपकी भूलोक स्वर्गलोक और पातललोक में कीर्ति अजरामार है । | 1 ||
  • हे अजन्नीपुत्र आपके समान इस धरती में और कोई बलवान नही है । | 2 ||
  • हे वीरों के वीर महावीर बजरंगबली आप सबसे महावीर है । आप दुष्ट विनाशक बुद्धि को दूर करते हो । वही आप अच्छे बुद्धि व्यक्ति के हमेशा ही सहायक रहे हो । | 3 ||
  • हे परमेश्वर आप सुनहरे रंग, वस्त्र, घुंघराले बाल, कानो मे कुंडल से सुशोभित है । | 4 ||
  • हे प्रभु आपके हात में वज्र और ध्वजा विराजमान है वही आपके कंधे पर मुंह के जनेऊ की शोभा है । | 5 ||
  • आप साक्षात भगवान शिवशंकर के अवतार है । आपके पराक्रम की यशोगाथा पूरे संसार में होती है । | 6 ||
  • आप विद्या का सागर हो । आप कार्यतत्पर हो और भगवान श्रीराम के कार्य के लिए आप हमेशा ही तत्पर और आतुर रहते हो । | 7 ||
  • आप रामचरित्र्य सुनने में हमेशा ही उस्तुक रहते हो । भगवान राम सीता और उनके छोटे भाई लक्ष्मण आपके दिल में बसे है । | 8 ||
  • आपने दोनो रूप धारण किए छोटा और बढ़ा । आपने अपना छोटा रूप धारण करके माता सीता को दीखाया वही आपने आपका बढ़ा रूप धारण करके लंका को जला दिया । | 9 ||
  • आपने श्रीराम जी के कार्यों को पूरा करने के लिए विक्राल रूप धारण करके राक्षसों का वध किया और भगवान राम के उद्देशों को पूरा किया । | 10 ||

जानिए रामसेतु के पिछे का रहस्य?

  • आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मणजी का प्राण बचाया । भगवान राम ने हर्षित होकर आपके अपने गले से लगाया । | 11 ||
  • भगवान रामजी ने आपकी बहुत तारीफ की और कहा की तुम मेरे भरत भाई जैसे प्रिय हो । | 12 ||
  • भगवान राम ने तुम हृदय से लगाकर कहा की तुम्हारा यश हजार मुख से भी ऊपर है । | 13 ||
  • श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनंदन, श्री सनत्कूमार और अन्य मुनि, भगवान ब्रह्मा आजी देवता, नारदमुनिजी, माता सरस्वतीजी, शेषनगजी सब आप का ही गुणगान करते रहते है । | 14 ||
  • यमराज, कुबेर, और सभी अन्य दिशाके रक्षक, सभी पंडित, विद्वान पूर्णतः आपके सामर्थ्य का विश्लेषण नही कर सकता । | 15 ||
  • आपने राजा सुग्रीव को भगवान राम से मिलाकर उपकार किया जिससे वो राजा बने । | 16 ||
  • आपके आदेश उपदेश का बिभीषणने पालन किया और वो लंका के राजा बन गए । | 17 ||
  • आपकी कीर्ति अपरंपार है । आपने जो सूरज जो १००० योजन दूरी पर है । उस तक पहुंचने के लिए हजार युग लगे आपने बस उसे एक मीठा फल समझ कर निगल लिया । | 18||
  • आपने भगवान रामजी की अंगूठी अपने मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया इसमें कोईभी आश्चर्य नहीं है । | 19 ||
  • दुनिया में जितने भी कठिन काम है वो आपकी कृपा से सहज और आसान हो जाते है । | 20 ||
  • भगवान रामजी के द्वार के आपही रखवालदार है । आपके आदेश के बिना रामजी के मन में किसीको भी प्रवेश नहीं मिल सकता । | 21 ||
  • इसका सहज मतलब यह है की भगवान राम को प्रसन्न करना है तो आपकी प्रसन्नता भी उसको हासिल करनी होगी । | 22 ||
  • जब भी कोई आपके शरण में आता है तो उसे आनंद प्राप्त हो जाता है । आपकि शरण में आने वाले व्यक्ति की किसी बात का डर नही रहता है । | 23 ||
  • दुनिया में आपके सिवाय आपके वेग को और कोई भी नही रोक सकता । आपकी गर्जना से तीनो लोक यानी स्वर्ग भूलोक और पाताल लोक कांप जाते है । | 24 ||
  • आपका नाम सुनकर भूत पिशाच पास भी भटक नही सकते । महावीर का नाम सुनकर वो नजदीक भी नही आ सकते । | 25 ||
  • हे वीर हनुमान जी आपका सतत जप और स्मरण करने से सभी पीड़ा और रोग नष्ट हो जाते है । | 26 ||
  • भगवान बजरंगबली विचार करने में, बोलने में, काम करने में जिसका भी ध्यान आपमें होता है उनको सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है । | 27 ||
  • महान तपस्वी राजा श्रीराम सबसे श्रेष्ठ है । उनके सभी कार्यों को आपने बड़ी सहजता से आसान बना दिया । | 28 ||
  • हे महावीर जिसपर आपकी कृपा होती है वो जीवन में कोई भी अशिलाषा आकांक्षा रखे तो पूरी होती है । उसे जीवन में ऐसा फल मिलता है जिसकी कोई सीमा नही होती । | 29 ||
  • चारो युग युग यानी सतयुग त्रेतायुग द्वापरयुग और कलयुग में आपकी कीर्ति फैली हुई है । आपकी यशोगाथा प्रकाशमान है । | 30 ||
  • हे भगवान राम के दूल्हारे आप सज्जनों के रखवाले हो और दुष्टों का नाश करते हो । | 31 ||
  • हे अंजनीपुत्र आपको माता जानकी से ऐसा वरदान मिला है जिस की मदत से आप किसी की भी आठों सिद्धियां और नौ निधिया दे सकते हो । | 32 ||
  • आप हमेशा ही रघुनाथ के शरण में रहते है । जिसकी वजह से आपके आप बुढ़ापा और असाध्य रोगों के इलाज के लिए राम नाम की औषधि है । | 33 ||
  • आपका भजन करने से, आपका स्मरण करने से भगवान श्रीराम जी प्रसन्न हो जाते है । जिसे भी वो प्रसन्न हो जाते है उसका जन्म जन्मांतर का दुख दूर हो जाता है । | 34 ||
  • जीवन के अंत में हम सब रघुनाथजी के धाम ही जाते है । अगर फिर से जन्म लिया तो हम भगवान राम के भक्त कहलाएंगे । | 35 ||
  • ही हनुमान जी आपकी आराधना और सच्चे मन से सेवा करने से सभी फल मिलते है । इसके लिए अन्य किसी देवता की आराधना करने की की जरूरत नहीं है । | 36 ||
  • हे हनुमानजी जो आपका सुमरण स्मरण करता है उसको सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है । उसकी सभी पिड़ाए दूर हो जाती है । | 37 ||
  • हे हनुमान जी आपकी जय हो । जय हो ।जय हो । आप मुझपर कृपालु गुरुजी के समान कृपा करे । | 38 ||
  • को भी इस हनुमान चालीसा का सौ बार पठन करेगा वो सभी बंधनों से छूट जायेगा और उसे परमानंद मिलेगा । | 39 ||
  • भगवान शिवशंकरजी ने इस हनुमान चालीसा को लिखवा लिया । वो साक्षी है । कोई भी इसे पढ़ेगा उसे शाश्वत सफलता प्राप्त होगी । | 40 ||
  • हे नाथ हनुमानजी । तुलसीदास सदैव ही भगवान रामजी के दास है । इसलिए आप उसके हृदय में निवास करे । | 41 ||
  • हे संकटमोचन हनुमान । आप आनंद और हर्ष के स्वरूप है । ही देवो के देव, आप श्रीराम, माता सीता, और भाई लक्ष्मण के साथ मेरे हृदय में प्रवेश करे । | 42 ||

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