Jagannath Puri Mandir History: जगन्नाथ पूरी मंदिर का रहस्य

देश भारत जो जिसने कितने रहस्य अपने सीने में छुपाकर रखा है। लाखो लोग हर दिन इस रहस्य की अनुभूति करते है। इन रहस्यों में आम तौर पे मंदिरों में छुपे राज और ऊनी पीछे की कहानियां इन्हे जानने के लिए लोग आज भारत में मौजूद कोईभी मंदिर ऐसा है जो राज से भरा नही हो। आज हम ऐसे ही एक मंदिर के रहस्यों को जानने की कोशिश करेंगे। इस मंदिर का नाम है Jagannath puri mandir history.

भारत में चार धाम के दर्शन करना या फिर इसे हम यात्रा करना इसका हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। इन चार धाम में जगन्नाथ पुरी मंदिर एक धाम है। इसके अलावा रामेश्वरम बद्रीनाथ और द्वारका तीन धाम है जहा करोड़ों लोग हर साल दर्शन करने आते है।

आज हम Jagannath puri mandir history में उन अनोखे रहस्य आपको बताएंगे जिसे पढ़कर आप जगन्नाथ पुरी मंदिर में जाने से खुद को रोक नहीं सकते।

जगन्नाथ पुरी मंदिर के रहस्य (where is puri jagannath temple)

Jagannath puri mandir history
                                               puri jagannath temple god images

ओडिसा के तट के किनारे बसे जगन्नाथ पुरी मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। हर साल यहां लाखो लोग दर्शन करने आते है। ये मंदिर ८०० साल पुराना होने के कारण लोग इसे देखने देश और विदेश से आते है। इन रहस्यों की सच्चाई आजतक पता नही चल पाई है।

मंदिर में सुनाई नही देती समुद्र की आवाज

तो कहने के लिए ये मंदिर समुद्र के किनारे बसा है। लेकिन जब भी आप मंदिर के अंदर जाते है तो आपको बाहर की समुद्र की आवाज बिलकुल सुनाई नही देती। दूसरी तरफ जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर निकलेंगे तो आपको समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है। मंदिर के अंदर मौजूद हर जगह किसी न किसी रहस्य से जुड़ी है।

मंदिर में प्रसाद कभी खत्म नहीं होता

मंदिर के चाहे हजारों लाखो या फिर करोड़ों लोग एक ही दिन में दर्शन करने को क्यू ना आए उन भक्तों के लिए प्रसाद की कभी कमी नहीं महसूस होती। हर समय प्रसाद तैयार रहता है। भंडार भरा रहता है। ऐसी समझ है की, भगवान जगन्नाथ जी का यह निवास होने के कारण यह हर दिन लाखो लोगो को प्रसाद खिलाया जा सकता है। हर दिन कितने भी श्रद्धालु बढ़ ही क्यों न जाए। हर भक्त को प्रसाद जरूर मिलेगा।

प्रदान बनाने का भी एक रहस्य है। प्रसाद बनाते वक्त सात बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते है। लेकिन चमत्कार तब होता है जब ऊपर वाला बर्तन में रखा खाना सबसे पहले पक जाता है। तो चाहे कितने भी लोग आए प्रसाद काम नही पड़ता। यहां प्रसाद बनाने के लिए ५०० रसोई और उनके ३०० सहयोगी काम करते है। यानी करीब ८०० लोग मिलकर महाप्रसाद तैयार करते है।

पुराण के अनुसार जगन्नाथ पुरी को वैकुंठ माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण जीने यह निवास किया था। भगवान विष्णु का अवतार होने के कारण इस जगह को वैकुंठ का स्थान दिया गया है।

उल्टी दिशा में लहराता है जगन्नाथ मंदिर का झंडा (Jagannath puri mandir history)

दोस्तो, ये एक ऐसा रहस्य है जिस आजतक कोई समझ नही पाया है। मंदिर का झंडा हवा के विपरित दिशा में लहराता है। आमतौर पे हवा दिन में समुद्र से धरती की तरफ चलती है और रात को धरती से समुद्र की तरफ हवा का रुख होता है। लेकिन शिखर पर मौजूद झंडा विपरित लहराता है। ऐसा क्यों होता है ये किसी को अब तक पता नहीं चला।

दोस्तो, भारत में कुछ गिने चुने मंदिर है जिनका झंडा हर दिन बदलता है। जगन्नाथ मंदिर का भी झंडा हर दिन बदलता है। हर दिन भक्त शिखर पे जाकर इस मंदिर का झंडा बदलते है।

इस मंदिर का ध्वज एक दिन भी नही बदला तो ये मंदिर १८ सालो के लिए बंद हो जाएगा। जगन्नाथ मंदिर के शिखर पे एक सुदर्शन चक्र लगा है। ऐसा कहा जाता है की, उसे किसी भी दिशा से देखो तो आपको लगेगा की चक्र का मुंह आपकी तरफ है।

मंदिर की छाया का रहस्य

मंदिर इतना ऊंचा होने के बावजूद भी इसकी छाया नही दिखाई देती। सुबह से शाम तक इस मंदिर की छाया अदृश्य ही रहती है। ये एक चमत्कार नहीं तो क्या है? की सूरज की किरणे मंदिर पे पड़ने के बाद भी मंदिर की परछाई दिखाई नही देती।

मंदिर के नीचे खजाना

मंदिर की ऊंचाई जितनी है उतना ही वो गहरा भी है। ऐसे कयास बांधे जाते थे की मंदिर में विशाल खजाना छुपाया गया है। खजाने में रुपए पैसे की नही बल्कि हीरे और जवारात भी शामिल है।

ओडिसा हाईकोर्ट के आदेश पर २०१८ को कड़ी सुरक्षा के अंतर्गत १६ सदस्यीय टीम जांच के लिए आई थी। इसके बाद मंदिर के खजाने की कक्ष की चाबी को जाने की बात सामने निकलकर आई है। ये चाबी आजतक नहीं मिली है।

खजाना देखकर जब १६ सदस्यीय टीम वापस आई तो उन्होंने शपथ ली थी की वो इस खजाने का जिक्र किसी के साथ नही करेंगे। एक बार एक मजदूर एक चांदी का सिक्का लेकर भाग गया था तो जब जांच के लिए कमरे को खोला गया तो एक कमरे का खजाना लगभग १०० करोड़ के आसपास होगा ये अंदाजा बांधा गया। इसमें जांच के वक्त चांदी की ईट मिली थी। इस से ये कयास बांधे गए की मंदिर ने करोड़ों या खजाना मौजूद है।

मंदिर के निर्माण का रहस्य (who built jagannath temple at puri)

Jagannath puri mandir history में मंदिर का निर्माण राजा इंद्रदेवमन ने किया था। उन्हे सपने में भगवान विष्णु जी ने दर्शन देकर कहा था की निलंचन पर्वत की गुफा में मूर्ति है जिसे नील माधवन कहते है। इस गुफा में एक मंदिर का निर्माण करे। राजा ने सेवको को भेजा और मूर्ति लाने के लिए कहा। सेवको ने निलांचन पर्वत को खोजा और वहा से मूर्ति चुरा ली।

लेकिन भगवान नील माधवन दुखी हो गए और वापस उसी गुफा में चले गए। जाते समय वो राजा से वादा करके गए की वो एक दिन वापस लौटेंगे। लेकिन शर्त भी रखी वो जिस दिन लौटेंगे वो उनके लिए एक मंदिर बनायेंगे। राजा ने मंदिर बनवा लिया और भगवान विष्णु को कहा की आप मंदिर में विराजमान हो जाए।

भगवान विष्णु ने कहा की आप समुद्र में तैर रहा बड़ा पेड़ का टुकड़ा उठाकर लेकर आइए। राजा ने पेड़ का टुकड़ा खोजा। लेकिन वो और उसके सैनिक पेड़ के टुकड़े को उठाने में असफल रहे।

तभी राजा को समझ आया की, नील माधव के भक्त ही इस पेड़ के टुकड़े को उठा सकते है। तब उन्होंने उस समय तबीले के मुखिया विश्वर वासु की सहायता लेने का फैसला किया। विश्वर् वासु ने पेड़ का टुकड़ा उठाकर राजा के सामने पेश किया।

अब मूर्ति बनाने की बारी थी। मूर्ति बनाने के लिए कई कारागिरो ने प्रयास किए लेकिन कोई भी उसके अंदर एक कील भी मार नही पाया।
तब उस समय के कुशल कारागीर विश्वकर्मा आम आदमी का पहराव करके राजा के सामने आ गए। राजा के सामने उन्होंने शर्त रखी की मुझे २१ दिन का समय दीजिए। इसके साथ ही इस २१ दिन में मूर्ति बनाते वक्त कोई भी मेरे आसपास नही होना चाहिए। विश्वकर्मा ने कहा की वो मूर्ति अकेले में बनायेंगे।

लेकिन एक दिन रानी के कहने पर राजा ने दरवाजा खोला और उनके सामने तीन अधूरी मूर्तियां पड़ी मिली। वो आम बूढ़ा आदमी गायब था।
उन तीन मूर्तियों में भगवान नील माधव और उनके भाई के छोटे छोटे हात बने थे। लेकिन उनकी टांगे नही बनी थी। बीच में मौजूद सुभद्रा के हात और पैर बनाए ही नही थे। राजा ने इसे भगवान की लीला मानकर अधूरी बनी मूर्तियों को स्थापित कर दिया। तब से लेकर आजतक तिन्हो भाई बहन इसी रूप में विराजमान है।

 क्या जगन्नाथ मंदिर कल खुला है? (is jagannath temple puri open tomorrow)

लोग गूगल पे अक्सर सवाल करते है की, क्या कल जगन्नाथ मंदिर खुला है? जगन्नाथ मंदिर भक्तो के दर्शन करने के लिए हरदिन खुला रहता है.

रामेश्वरम मंदिर की स्थापना का रहस्य

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