क्या था जंजीरा में जो छत्रपति शिवाजी महाराज भी जीत नहीं पाए

दोस्तो, महाराष्ट्र में मौजूद मुंबई से १६५ किलोमीटर दूर मुरुड शहर में बसा जंजीरा किला भारत की तथा महाराष्ट्र की शान है। आज भी लाखो लोग हर दिन इसे भेट देते है और उस समय मौजूद भारत की सैन्य इंजीनियरिंग की कला का अभ्यास करते है। हेलो दोस्तो मेरा नाम है निलेश और आज हम बात करेंगे janjira fort की।

ये अंडाकार अभेद्य किला चारो तरफ से पानिंसे घिरा हुआ है। इसे बनाने से लेकर इसकी रचना किस तरह से की गई इसके बारे में हम विस्तार से जानेंगे। ये किला उन चुनिंदा किलो में से एक है जिसे कोई भी शासक इतिहास में जीत नही सका। आज हम इस किले की ऐसी ही अनोखी जानकारी आपको बताएंगे।

इस किले को बड़े शासकों ने जितने की कोशिश की लेकिन वो भी नाकामयाब रहे। जिसमे सबसे बड़ा नाम है छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज का नाम सबसे पहले आता है।

इन दो राजाओं ने अपने शासन काल में इस किले पर धावा बोला था लेकिन कुछ कारणवश वो इसे जीत नही सके। ऐसा क्या था इस किले में जो हर कोई हार रहा था। छत्रपति संभाजी महाराज ने इस किलेतक जाने का रास्ता बनाया लेकिन वो भी अंत में अंतर्गत राजनीति का शिकार हो गए। पहले इस किले के बारे में जान लेते है।

जंजीरा किले की जानकारी:

janjira fort

जंजीरा शब्द अरबी शब्द जजीरा से लिया गया है। इस किले को अरबी समुद्र में इसलिए बनाया था की दुश्मनों से बचाया जा सके। इसे १२ वी शताब्दी में अरबी राजाओं ने बनाया है।

इस किले तक पहुंचने के लिए आपको मुरुड गांव से जाना होता है। इस किले की रचना इतनी बेहतरीन की है की, साइड से आपको ये किला समुद्र से घिरा नजर आएगा। लेकिन अंदर से आपको एक कुआ मिलेगा जिसमे आपको मीठा पानी मिलता है। इस किले की विशेषता ये है की ये चारो तरफ से पानिंसे घिरा है इसलिए इसे आइलैंड फोर्ट भी कहा जाता है। ये भारत के मजबूत किलो में गिना जाता है।

अरब सागर में मौजूद एक विशाल चट्टान पे बना ये किला अभेद्य है। इतिहास के इस किले ने कितनी लड़ाई झेली है लेकिन आज भी ये सीना तानकर खड़ा है। ये किला महाराष्ट्र राज्य के कोकन जिला ने मौजूद है। ब्रिटिश पुर्तगाली मराठा सभी समाजों ने इस किले को पाने की कोशिश की लेकिन वो सब विफल रहे।

जंजीरा किले के द्वार 

इस किले के मुख्य द्वार पर आपको छह हाती मिलेंगे जो की एक बाघ घिरा है। एक समय ऐसा था जब इस किले पर ५०० सो तौफे थी जो इस किले की मजबूती से रक्षा करती थी। लेकिन आज की बात करे तो कुछ तौफे ही मौजूद है जो सिर्फ दिखाए जाने के लिए रखी है। इसमें भवानी लड़कसम और कलालछुरी है। ये तौफे सिद्धि साम्राज्य की मनपसंद हत्यारे थी। पांच धातुओं से बनी ये तौफे जंजीरा की शान है।

इस किले को मजबूत रक्षा प्रणाली के हिसाब से बनाया गया है। जंजीरा किले की रक्षा करता है इसके आस पास मौजूद समुद्र का पानी। किसी को इस किले पर आक्रमण करना होता था तो पहले उसे पानी से होकर किले तक पहुंचना पड़ता था। यही पानी था जो उस समय सिद्धियों की रक्षा करते थे।

अगर कोई सेना पानी से होकर किले तक पहुंचता था तब भी उसे प्रवेशद्वार ढूंढना आसान नहीं था। कोई शत्रु द्वार का पता लगाने में कामयाब हो जाता था तब यहां मौजूद तौफे उसका खात्मा करती थी।

किले की दीवार ग्रेनाइट से बनी है। किले के भीतर जाने के लिए आप इन दीवारों को भेद नही सकते। कहा जाता है की, किले की दीवारों को बनाने के लिए उस समय एकसाथ हजारों मजदूरों अपना दिन रात एक किया है। ये मजदूर बाद के इसी किले के पास बस गए। सिद्धि मुस्लिम थे तभी यहां मश्चिद के खंडर पाए जाते है।

जंजीरा किले में मौजूद पानी का रहस्य

इस किले में आपको पानी की टंकियां मिलेगी जिसका उपयोग बारिश की दोनो के वो करते थे। इस किले के अंदर एक शाही महल है जो दिखने के लाज़वाब है। ये महल अभी भी सही सलामत है। अभी कुछ दिनों पहले इसकी तट टूटे जाने की खबर आई थी। दिवारे ग्रेनाइट से बनने के कारण अभी भी ये मजबूत है।

जंजीरा किले में मौजूद सामग्री 

किले के अंदर इमारती, रसोई घर, तबेले, व्यापारी लोगो के घर, भूमिगत मार्ग मौजूद है। किया को देखकर ऐसा लगता है की यह एक सभ्य समाज की स्थापना की होगी। सिद्धि इतने कुशल थे की, बड़े बड़े राजाओं ने इनपर आक्रमण किए लेकिन वो उन्हे पराजित नहीं कर सके। मराठों ने इसके नजदीक एक और किला भी बनाया लेकिन इसके बावजूद वो भी इसे जितने में कामयाब ना रहे।

आज के दशक में किले के अंदर का बहुत सा भाग खंडर है। प्रमुख द्वार पे बहुत सी अच्छी कलाकृति है जिनपर प्राणियों तथा पक्षियों की कलाकृति है। मुख्य द्वार सीधे किले के मुख्य दरबार तक जाता है। किले का दूसरा द्वार पश्चिम की और मौजूद है। इसे दरिया द्वार के नाम से पहचाना जाता है। ये द्वार मुसीबत के वक्त भागने के लिए काम आता था। जब भी कोई शत्रु आक्रमण करता था तो उनसे बचने और उन्हे सामग्री पहुंचाने के लिए इस द्वार का उपयोग किया जाता था।

जब आप मुख्य द्वार से अंदर जाते हों तो आपको एक कमरा मिलता है। इसे पीर पंचायत के नाम से जाना जाता है। इसके आगे आपको घोड़ों के तबेले दिखेंगे। अगर आपको महल दिखता है। महल के उत्तर में आपको पानी का कुआ या फिर झील भी कह सकते है। ये सभी चीजे आपको इस किले में मिलेंगी। महा की बालकनी से आपको इमारत दिखेगी जिसे सदर से नाम से जाना जाता है।

जंजीरा किला कहा है?

अगर आप चाहते हो इस किले में आना तो आप सुबह ७ बजे से रात ९ बजे तक इस किले में आ जा सकते हो। इस किले तक जाने का रास्ता मुंबई से १५० किलोमीटर दूर मुरुड तक पहुंचने के लिए आपको मुंबई पुणे होकर आपको अलीबाग पहुंचना है। उसके आगे आपको रवांडा से मरूड़ तक पहुंच सकते है। किले का इतिहास जानने के लिए आपको एक बार तो इस किले को भेट जरूर देना होगी।

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