सिंधदुर्ग किले का इतिहास

Hello friends, आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे सिंधुदुर्ग जिले में मौजूद Sindhudurg fort की। विस्तार से जानेंगे की, आखिर क्या सिंधुदुर्ग किले के इतिहास क्या है। इसी के साथ हम आपको इस किले की जानकारी भी देंगे।

सिंधुदुर्ग किले का निर्माण मराठा साम्राज्य के देवता छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा किया सन १६६७ में किया था। इस किले को मराठाओं ने बनाए जाने का मुख्य उद्देश ये था की विशेष शासकों के बढ़ते कदमों तक भारत किनारे आने से रोकना था। इसी के साथ सिद्धि समुदाय जो की जंजीरा किले की और से आक्रमण कर रहा था इनपर भी रोक लगाना था।

इस किले को बनाने में हिरोजी इंदलकर ने अहम भूमिका निभाई थी। Sindhudurg fort histroy में आए जानते और सिखते मराठा साम्राज्य के इतिहास की एक अहम कड़ी के बारे मे जान लेते है। इसका निर्माण १६६४ में शुरू हुआ और १६६७ में पूरा हुआ था।

सिंधुदुर्ग किले का इतिहास:

sindhudurg fort

ये किला सन १६६७ में बनकर पूर्ण हो चुका था। इसका निर्माण करने की जिम्मेदारी छत्रपति शिवाजी महाराज ने हीरोजी इंदलकर को सौंपी थी। इस किले के निर्माण में लीड वाले पत्थरो का उपयोग किया था। किले को बनाने में ३ वर्षो से अधिक का समय लगा था।

ये किला भारत के सबसे बड़े किलो में से एक है जो की ४८ एकर में फैला हुआ है। इस किले ने सुरक्षा पे खास जोर दिया था। मजबूती के हिसाब से ये किला भारत के उन चुनिंदा किलो में गिना जाता है जिसकी तट और दीवार अभेद्य थी। सुरक्षा दीवार का निर्माण करने का मकसद यहीं था की दुश्मनों के द्वारा इसे भेदा न जा सके।

इसी कारणवश इस दीवार को ३ किलोमीटर तक लंबा बनाया गया था। किले की बाहरी दीवार आंतरिक दीवारों से काफी मोटी है और चौड़ी भी है। दीवार ३० फीट ऊंची है वही १२ फीट चौड़ी है। इस किले को दोनो तरीके की सुरक्षा प्रदान करने के लिए दीवार को ऐसा बनाया था।

Sindhudurg fort history: 

पहला था आंतरिक सुरक्षा जिसमे दुश्मनों से बचाया जा सके। और दूसरी सुरक्षा थी समुद्र की लहरे जो अंदर तक ना जाए। इन्ही दो कारणवश किले की दीवारों को इतना ऊंचा और चौड़ा बनाया गया था।

किले का मुख्य प्रवेशद्वार को इस कदर छुपाया गया था की दुश्मन को पता भी नही चलेगा की यहि से उसको अंदर आना है। कई पीढ़ी ने यहां उनका जीवन व्यतिथ किया था। लेकिन रोजगार के अवसर घटने पाने वो यह से पलायन करके किसी और जगह प्रस्थान कर गए।

वर्तमान में इस किले में १५ परिवार निवास करते है। ये किला गोवा के उत्तर में स्थित सिंधुदुर्ग जिले में है। या किला मुंबई से २५० किलोमीटर दूर है। आपको यहां पहुंचने के लिए मुंबई गोवा रेल्वे स्टेशन से कोंकण में सिंधुदुर्ग तक आना होगा। ध्यान दे की यह कुछ हीं ट्रेन रुकती है जो सिंधुदुर्ग स्टेशन पे आती है।

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