तुळजाभवानी मंदिर के मौजूद करिश्माई पत्थर और छल्ले की कहानी

एक ऐसा मंदिर जहां तुलजाभवानी जो छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदैवत है। आज हम बात करेंगे Tulja bhavani temple mystery में उस राज के बारे में जो आज भी एक अजूबा है।

ये एक ऐसा मंदिर है जहां पर देवी मां ने स्वयंम प्रकट होकर छत्रपति शिवाजी महाराज को तलवार भेट की थी। इस मंदिर में मौजूद माता की मूर्ति स्वयंभू है। आज हम इस मंदिर में मौजूद एक ऐसे पत्थर के बारे में जानेंगे जो ये दिख लाता है की आज भी इस दुनिया में चमत्कार होते है। इसी के साथ यह मौजूद छल्ले की ताकत भी हम देखेंगे।

मैं ये नही कहता की आप मुझपर विश्वास करे। लेकिन जीवन में आपको एक बार जरूर जाकर देख लेना चाहिए। तों चलिए जानते है Tulja bhavani temple mystery

तुळजाभवानी मंदिर का रहस्य:

Tulja bhavani temple mystery

दोस्तो , महाराष्ट्र के तूळजापुर जिल्हे में माता तुलजाभवानी का मंदिर है। ये है स्तन है जहां पर छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलस्वामिनी माता तुलजा भवानी स्थापित है। तुलजाभवानी का नाम साढ़े तीन शक्ति पीठों में शुमार होता है। ये भारत के उन ५१ शक्ति पीठों में से एक है। यह मूर्ति स्वयंभू है जो की एक जगह स्थापित नही है। मूर्ति की साल में तीन बार प्रदक्षिणा करवाई जाती है।

कहा जाता है की, देवी मां ने शिवाजी महाराज को जो तलवार भेट की थी। ये तलवार संग्रालय में आज भी आपको मिलेगी। इस मंदिर में दो प्रमुख द्वार है एक द्वार को सरदार निंबालकर का नाम दिया है तो दूसरे द्वार को छत्रपति शिवाजी महाराज के माता पिता का नाम दिया है।

द्वार में प्रवेश करते ही आपको तीर्थसमूह मिलेगा। इस तीर्थ समूह ने आपको १०८ तीर्थो के जल का समूह मिलेगा। इसके आगे सिद्धिविनायक का मंदिर है। मंदिर किं परंपरा ई अनुसार तीर्थो में स्नान करने के बाद आपको सबसे पहले भगवान सिद्धिविनायक का दर्शन करना चाहिए।

सिद्धिविनायक का दर्शन करने के बाद जब आप मुख्य द्वार से आगे जायेंगे तो आपको माता तुलजा भवानी किं प्रतिमा के दर्शन होंगे। मूर्ति को बनाने के पिए गंडगी पत्थर का उपयोग किया है वही माता की मूर्ति चांदी के पत्थर पर स्थापित की गई है।

माता के प्रताप अनोखे है। अष्ट भुजा वाली माता को असुरों का वध करने के लिए, वरदान देने केलिए जाना जाता था। माता की मूर्ति एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता है। मंदिर में दाई तरफ क्षयन कक्ष है जहा माता साल में तीन बार विश्राम करती है। इस तरह की परंपरा सिर्फ इसी मंदिर में है और कही इस प्रकार की परंपरा नही है।

Tulja bhavani temple mystery:

आप जब इस मंदिर में प्रवेश करते हो तो आपको एक स्तंभ नजर आएगा। इस स्तंभ के नजदीक आपको एक छल्ला नजर आएगा। इस छल्ले के बारे में कहा जाता है की, जब भी कोइ व्यक्ति छल्ले को छू लेता है या फिर उसे अपने शरीर से स्पर्श कर लेता है तो आपके शरीर में सभी दुख दर्द दूर हो जाते है।

आपके शरीर में कितनी भी वेदना हो। इस स्पर्श से आपके सभी दुख दर्द का अंत हो जाता है। इस मंदिर के एक अद्भुत पत्थर भी मौजूद है। इस पत्थर का नाम है चिंतामणि पत्थर। किसी को इस पत्थर के बारे में कुछ नही पता की ये पत्थर कब आया, किसने इसे रखा, किसने इसे स्थापित किया है। इस पत्थर की विशेषता ये है की, ये आपके सभी प्रश्नों का उत्तर सांकेतिक शब्दों में देता है। ये उत्तर हां या फिर नही में देता है।

मान लो की आपके मन मे कोई प्रश्न है तो आपको पहले इस पत्थर पे सिक्का रखना होगा। इसके बाद आपको हात रखने है। आप हात आराम से रखेंगे। आगे आपको मन में आपका जो भी सवाल है उसे याद करना है। तो आगे आओ सोच भी नही सकते वो हो जाता है। अगर आपके प्रश्न का उत्तर हां में है तो ये पत्थर दाई तरफ घूमने लगता है। अगर आपने मन में पूंछा हुआ सवाल का जवाब ना में है तो ये पत्थर बाई तरफ घूमता है। अगर आपके प्रश्न पूंछने पर भी ये पत्थर नही हिला तो आपको आपके प्रश्न का उत्तर मिलने में अभी समय है।

अगर आप तुलजभवानी मंदिर जाने की सोच रहे हो आज ही जाए। इस चमत्कार को एक बार अपने जीवन मौजूद समस्याओं को पूछकर देखिए ताकि आपको पता चलेगा की क्या उत्तर निकलकर आता है।

माना जाता है की, शिवाजी किसी भी युद्ध से पहले माता तुलजा भवानी के दर्शन करने जरूर आते है। दोस्तो, इस पत्थर की हकीकत जानने की बहुत से लोगो ने कोशिश की लेकिन आज तक उन्हे इस बात का कोई सबूत नहीं मिला की या पत्थर गलत बताता है। यहा के पंडित बताते हैंकी इसका सीधा संबंध मां तुलजाभवानी के साथ है। जब भी कोई भक्त सच्चे मन से माता को याद करता है तो माता उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करने की पूरी कोशिश करती है।

अगर आप उस्मानाबाद मंदिर में अभी तक नही पहुंचे तो एकबार जरूर जाकर इस पत्थर और छल्ले का चमत्कार देखे। क्या पता आपको किसी सवाल का जवाब तुरंत मिल जाए।

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