पति को ससुराल ज्यादा दिन क्यों नहीं रहना चाहिए?

नमस्कार दोस्तो, आज का टॉपिक काफी मजेदार है। लोग कहते है की पति को शादी के बाद उसके ससुराल ज्यादा दिन रहना नही चाहिए। आज हम बात करेंगे आखिर ऐसा क्यों कहते है (why men should stay away from in-laws house)

जब आपकी शादी हो जाती है तो आपको आपके पति के घर कुछ दिनों के लिए रहना ही पड़ता है। लेकिन ज्यादा दिन कोई नही रहता। तो इसके पीछे जो कथा है आज हम उसी कथा के माध्यम से जानेंगे की आखिर ऐसा क्या हुआ की ये प्रथा पद गई।

पति को ससुराल ज्यादा दिन क्यों नहीं रहना चाहिए?

why men should stay away from in-laws house

एक बहुत बड़े विज्ञान थे पूरे गांव में उनका बहुत बड़ा नाम था। लेकिन उनके पिता उनकी तारीफ कभी नही करते थे। उनके पिता उनको बच्चा समझकर उन्हे हर वक्त नज़रअंदाज़ कर देते थे।

अपने बापंसे परेशान बेटे ने फैसला किया को वो पिताजी को खत्म करगा। वो पिता को मारने के लिए उनके कमरे में जाता है। जैसे ही खिड़की के पास जाता है तो उसे अंदर से उसकी मां की आवाज सुनाई देती है।

उसकी मां उसके पिता को कह रही थी की, आपका पुत्र तो इतना बड़ा विद्वान बन गया है। सारा गांव उसकी प्रशंसा करता है लेकिन आप क्यू नही उसकी प्रशंसा करते।

इसपर उसके पिता का जवाब सुनकर बेटे के आंखो में आसू आते है। पिताजी कहते है। मैं भी जनता हु की, मेरा बेटा विद्वान है, और मुझे भी वो मेरा बेटा है इसका अभिमान है। लेकिन मैं यही चाहता की उसका मन गर्व से भर जाए। उसे हमेशा जमीन पर रखने के लिए मुझे ऐसा कहना पड़ता है।

इतना सुनते ही वो बच्चा अपने पिता के सामने रोता आया और हुई भूल कबूली। उसने पिता के सामने नतमस्तक होकर क्षमा मांगी। बेटे ने कहा की मैं तो आपको मारने आ रहा था। ये घोर पाप में आज करने वाला था। आप मुझे सजा दे। पिताजी ने बेटे की सभी बाते सुन ली और कहा बेटे मुझे ये बताओ की तुम्हे सबसे ज्यादा सम्मान कहा मिलता है।

बेटे ने मुस्कुराते हुए कहा पिताजी मुझे सबसे ज्यादा सम्मान मेरे ससुराल में मिलता है। उसपर पिताजी ने कहा की तुम अगले एक साल तक तुम्हारे ससुराल में ही रहोगे यही तुम्हारी शिक्षा है।

पिताजी की कही बात का पालन करते हुए विद्वान पुरुष और उसकी बीवी दोनो ससुराल चले गए। जैसे ही उन्होंने ससुराल में कदम रखा तो उनका स्वागत जोरो शोरो से किया गया।

सुरुवती कुछ दिन उनका स्वागत और मेहमान नवाजी अच्छी हुई लेकिन जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसकी मेहमान नवाजी के कमी आने लगी।
एक दो महीनो के बाद तो उससे ससुराल वाले काम करवाने लगे।

कुछ दिन बीत गए, ससुराल में अब वो अनजान नही रहा खेती, गाय को चारा लाना, उनको साफ करना ये सब काम उससे करवाने लगे।दूसरी तरफ उसकी पत्नी ये सब देख रही थी। उसने पति से बात भी की क्यों आप यह सब कर रहे हो। चलो हम अपने घर वापस चलते है। लेकिन वो वापस भी नही जा सकता उसको शिक्षा जो मिली थी। इसके ऊपर वो अपने पिता को वचन भी दे चुका था।

एक दिन विद्वान पति कुछ लिख रहा था तभी उसकी पत्नी उसके पास आती है। और कहती है की तुम ये क्या लिख रहे हो। पति कहता है की मैं श्लोक लिख रहा हु।

पत्नी हसकर कहती है की, इसे लिखना बंद करो इसकी कोई कीमत नहीं है तुम्हारे जीवन में, पति कहता है आज नही तो कल इसकी कीमत मुझे जरूर मिलेगी। पत्नी कहती है की चलो आज मैं इसे बाजार में बेचने जाती हु और सबसे ज्यादा कीमत लगाती हु। देखते है कोई खरीदने आता है की नही।

वो बाजार में चली जाती है और एक श्लोक का भाव १०० सुवर्ण मुद्राएं कर देती है। वो दिनभर बैठी रहती है लेकिन उसे कोई खरीदार नहीं मिलता।

उस प्रदेश का एक राजा था जो की बचा हुआ सभी वस्तुएं चीजे और माल खरीदता था। वो राजा उसके पास जाता है और कहता है की तीन ये क्या बेच रही हो। तो वो कहती है की मेरे पति विद्वान है और उन्होंने श्लोक लिखे है। मैं उनके श्लोक बेच रही हु।

राजा उसकी कीमत पूछता है और हड़बड़ा जाता है। लेकिन राजा अपने दिए हुए वादे से मुखरता नही और सभी श्लोक को खरीद लेता है।
वो मिला हुआ मुद्राएं देखकर कुश हो जाती है। जब वो अपने मायके आती है तो विद्वान पुरुष के ससुरलवाले खुश हो जाते है।

उसी दिन से उसकी पहले दिन जैसी मेहमान नवाजी की थी वैसी ही मेहमान नवाजी शुरू होती है। इस से आपको ये बोध मिलता है की, रिश्ता चाहे कौनसा भी हो, आदमी चाहे कैसा भी हो, ये मायने नहीं रहता। इस दुनिया में पैसा का महत्व आदमी से ज्यादा है।

इसके साथ ही दूसरा सबक ये मिलता है की, रिश्ते में मिठास तभी ज्यादा आती है जब वो अपना लगे। हर दिन आप हर रिश्ते में मिठास नही ढूंढ सकते।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग क्या है?

आशा है की आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा होगा। ऐसी ही अनोखी जानकारी हासिल करने के हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब और notification on करे ताकि जब भी हम नया आर्टिकल पब्लिश कर तो आप तक सीखा पहुंच जाए।

Leave a Comment

Your email address will not be published.